Monday, May 24, 2021

सरकारी विद्यालयों के बच्चों को मिल सकता है टैब या स्मार्टफोन

 

सरकारी विद्यालयों के बच्चों को मिल सकता है टैब या स्मार्टफोन



पटना: पहली से 12वीं तक के हर बच्चों को मिलेगा लैपटॉप और टैबलेट

बिहार सरकार शिक्षा को लेकर है चिंतित

बिहार में सरकारी और निजी स्‍कूलों के बीच फासले को कम करने के लिए शिक्षा विभाग ने लगातार कई कोशिशें शुरू की हैं।इस कोरोना जैसे महामारी में शिक्षा के ऊपर बहुत अधिक प्रभाव पड़ रहा है जिसको लेकर सरकार काफी चिंतित हैं इसलिए इस समस्या को दूर करने के लिए अब सरकार लगातार कोशिश में लगी हुई हैं

पहली से बारहवीं कक्षा तक लैपटॉप एवं टैबलेट

अभी सबसे बड़ी समस्या ये आ रही है कि सभी स्कूल एवं कॉलेज कोरोना महामारी को लेकर बंद पड़ा है जिससे बच्चों के पढाई पर काफी असर पर रहा है । इसलिए सरकार अब पहली से लेकर बारहवीं तक के सभी बच्चों को लैपटॉप एवं टैबलेट देगी ।इस योजना में से एक योजना है E-Library, जिसमे पहली से बारहवीं वर्ग के बच्चों के लिए पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई गयी है । इसमें टेक्स्ट बुक के अलावा ऑडियो और विडियो में भी पाठ्य सामग्री उपलब्ध है जिससे सभी बच्चे घर बैठे ही अपनी पढाई कर सकते हैं ।

E-Libarary और समस्याएँ

E-Library तो तैयार है लेकिन सबसे बड़ी समस्या ये है कि इस योजना का लाभ उठाने के लिए सभी के पास Smartphone, Latptop या Tablet होना जरुरी हैं जो की सभी बच्चों के पास नहीं होने से ये योजना कमजोर पड़ती जा रही हैं । क्योंकि बिहार सरकारी स्कूलों में ज्यादातर गरीब तबके एवं माध्यम वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं जिसकी वजह से वो इन Digital Divices का उपयोग करने में सक्षम नहीं है । इसलिए सरकार अब पूरी कोशिश में लगी हुई है की इन बच्चों को Digital Divices दी जाए जिससे वो पूरी तरह इसका लाभ उठा सके और अपने भविष्य को उज्जवल बना सके ।


बिहार के प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने स्वीकारा

बिहार सरकार ने डिजिटल डिवाइस के लिए केंद्र सरकार के पास प्रस्ताव भी रखा है और साथ ही सभी शिक्षा अभियान को Digitalization करने का भी अनुरोध किया है, जिससे पहली और बारहवीं वर्ग के बच्चे आसानी से ऑनलाइन पढाई का लाभ उठा सके । शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार ने जाकारी दी की केंद्र सरकार ने बिहार सरकार को डिजिटल डिवाइस उपलब्ध करने का पूरा भरोसा दिया है ।

सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में विभिन्नता पर विचार

बिहार के शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की अध्यक्षता में विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में, बिहार की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के बारे जानकारी दी । उन्होंने बताया कि बिहार में प्राइवेट और सरकारी स्कूलों के बच्चों में काफी अंतर देखनो को मिलता हैं इससे यहाँ के बच्चों में भी इस चीज की कमी खलती है । इस विभिन्नता को खत्म करने के लिए इस चालू वित्तीय वर्ष में होने वाली प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में राज्य सरकार की ओर से डिजिटल डिवाइस का प्रस्ताव रखा जायेगा ।

डिजिटल शिक्षा, शैक्षणिक प्रबंधन एवं नई शिक्षा निति पर हुई चर्चा

इस योजना से सरकारी स्कूल के बच्चे अब ऑनलाइन पढाई कर सकेंगे क्योंकि बिहार सरकार ने केंद्र से ऑनलाइन पढाई के लिए स्मार्टफोन, लैपटॉप एवं टैबलेट की मांग की है । साथ ही समग्र शिक्षा अभियान को डिजिटल डिवाइस का का प्रावधान करने की भी मांग की गयी हैं ।

33 लाख बच्चों का हुआ चालू सत्र में नामांकन

बिहार शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार ने जानकारी दी चालू सत्र में बड़े पैमाने पर नामांकन अभियान को केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के समक्ष रखा गया । सभी कक्षाओं को मिलकर लगभग 33 लाख बच्चों का नामांकन हुआ था । पिछले शैक्षणिक सत्र में विद्यालय सही ढंग से नहीं चलने के कारण सभी बच्चों के लिए कैच-अप कोर्स की पूरी तैय्यारी कर ली गयी हैं लेकिन कोरोना महामरी के करना इसे प्रारंभ नहीं किया जा सका ।

बिहार में शिक्षकों का घोर अभाव है।

सरकार जितना चाहे उतना टैब या स्मार्टफोन बाँट ले लेकिन इन टैब या स्मार्टफोन में भी ऑनलाइन शिक्षा देने के लिए शिक्षकों की आवश्यकता है । बिहार में बीते 3 साल से 94000 शिक्षकों की बहाली नही हुई है सरकार पहले वो पूरा कर ले तभी ये योजना सफल हो पाएगी।

ऐसे उठायें E-Class का लाभ

सरकार की यह योजना सफल हुई तो इससे सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बच्चों के बीच जो अंतर देखनो को मिलता है वो समाप्त हो जायेगा । दूरदर्शन पर चल रही ई-क्लास के साथ साथ ई-लाइब्रेरी का भी फ़ायदा उठा पाएंगे । अगर आप के पास एंड्राइड मोबाइल है तो आप इसे अपने मोबाइल के प्ले-स्टोर पर उपलब्ध एंड्राइड अप्प (e-LOTS) के माध्यम से भी फ़ायदा उठा सकते हैं । इस एंड्राइड एप्प को निचे दिए गये लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं 

http://bepclots.bihar.gov.in/

Sunday, May 23, 2021

बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर उठ रहे है सवाल क्योंकि बिना शिक्षक के पढ़ रहा है बिहार

 बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर उठ रहे है सवाल क्योंकि बिना शिक्षक के पढ़ रहा है बिहार

पटना: बिहार में वर्तमान में प्राथमिक शिक्षा की स्तिथि काफी दयनीय है क्योंकि बिहार में विद्यालयो की संख्या में बढ़ोतरी हुई , छात्रों के नामांकन में भी इजाफा हुआ परंतु शिक्षक की भर्ती लंबे अरसे से बंद है जिस कारण बिहार के छात्र बिना शिक्षक के ही पढ़ रहे है इस बात को हम कुछ आंकड़ो के माध्यम से समझते है जो राज्य और केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2015-16 में जारी किया गया है। विदित रहे की उसके बाद ना सरकार ने डाटा जारी किया ना ही शिक्षको का नियोजन किया है| राज्य में पिछले सात साल से कोई शिक्षक बहाल नहीं हुए है |


बिहार राज्य में कुल 41762 प्राथमिक एवं 26523 मध्य विद्यालय है।बिहार के प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 3276 जहाँ 1 शिक्षक,12507 विद्यालय जहाँ 2 शिक्षक , 10595 विद्यालय जहाँ 3 शिक्षक,7170 विद्यालय जहाँ 4 शिक्षक,4366 विद्यालय जहाँ 5 शिक्षक,3874  विद्यालय जहाँ 5 से अधिक शिक्षक है।यानि की बिहार के लगभग 42 हजार प्राथमिक विद्यालय में से कुल 3874 विद्यालय ही कुल मिलाकर कुछ हद तक शिक्षकों को बच्चों के लिए उपलब्ध करा रहा है |


अब बिहार के मध्य विद्यालय का हाल देखिये 

बिहार के मध्य विद्यालयों की संख्या 3462 जहाँ 5 से कम शिक्षक,2831 विद्यालय जहाँ 5 शिक्षक , 3507 विद्यालय जहाँ 6 शिक्षक,3567 विद्यालय जहाँ 7 शिक्षक,3397 विद्यालय जहाँ 8 शिक्षक,12406  विद्यालय जहाँ 8 से अधिक शिक्षक है।

पूरे बिहार राज्य में 8004 ऐसे विद्यालय है जहाँ शिक्षक छात्र का अनुपात 100 से ज्यादा का है। जबकि पूरे बिहार राज्य का शिक्षक छात्र का अनुपात 57 है। सीतामढ़ी जिला का शिक्षक छात्र का अनुपात 75  है और नालंदा का शिक्षक छात्र का अनुपात 42 है। 


बिहार में 2007-08 में सरकारी विद्यालयों की संख्या 66627 थी जो 2015-16 में बढ़कर 70934  हो गई।



बिहार के प्राथमिक विद्यालयों में 2007-08 में कुल बच्चों का नामांकन 14,629,233 था जो 2015-16 में बढ़कर 16,170,088 हो गया।



बिहार में 2021-22 सत्र के लिए प्रवेशोत्सव : नामांकन अभियान के तहत पूरे बिहार में  24 मार्च 2021 तक कुल 32,08,503 बच्चों का नामांकन हुआ है।



बिहार के प्राथमिक विद्यालयों में 2007-08 में शिक्षक छात्र अनुपात 54 था  जो 2015-16 में बढ़कर 57 हो गया। क्योकि शिक्षको की बहाली कई वर्षो से नही हुई है। 

राज्य में कुल शिक्षको की संख्या 383176 है। ये बिहार सरकार के डाटा 2015-16 के अनुसार है जिसके बाद ना डाटा आया ना शिक्षक बहाली हुई| विदित हो की शिक्षा मंत्री खुद सदन में ये मानते है की बिहार में सवा तीन लाख शिक्षकों के पद रिक्त है अब बिहार की शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है | ये आंकड़े और भी भयावह हो गए होंगे क्योंकि 2015 से शिक्षक कम तो हुए लेकिन भरने की कार्रवाई नहीं की गयी |



ये जो तथ्य आप ने अभी पढ़ा ये तो विहार की वर्तमान शिक्षा की स्थिति को बता रहा हैं लेकिन हमारा बिहार ऐसा नही था प्राचीन काल में नालंदा तक्षशिला जैसी विश्व विख्यात शिक्षण संस्थान हमारे बिहार में हुआ करती थी जहाँ पर विश्व भर के छात्र पढ़ने आते थे

वो गौरव बिहार को पुनः कब प्राप्त होगा ये तो हमारी सरकार के गर्व में छुपा हैं

RTE Act 2009 के तहत 1से 8 तक की शिक्षा को मौलिक अधिकार में शामिल कर दिया गया आज हमारी सरकारें बच्चों के मौलिक अधिकार का हनन कर रही हैं मौलिक अधिकार का हनन करना किसी अपराध से कम नहीं हैं।



बिहार प्रारंभिक शिक्षक नियोजन(@btetctet) ट्विटर और फेसबुक पेज के द्वारा 30 मार्च 2021 से ही हैश टैग 

#बिना शिक्षक के पढ़ रहा है बिहार  द्वारा इन बातों को लगातार बिहार सरकार और शिक्षा मंत्री तक पहुचाने का प्रयास किया जा रहा है।


बिहार प्रारंभिक शिक्षक नियोजन(@btetctet) ट्विटर पेज के द्वारा सभी शिक्षक अभ्यथियों से 24 मई को 11 बजे से अपना एक दो मिनट का एक वीडियो बनाकर हैशटैग #Bihar_Needs_Teachers का उपयोग कर ट्विटर पर ट्वीट और रिट्विट करने आवाहन किया गया है इस वीडियो में अभ्यथी  नियोजन नहीं होने से अपना  मानसिक ,आर्थिक और सामाजिक  तकलीफ को बतायेगें और कोरोना काल में उत्पन्न हुई परेशानी को सरकार तक पहुचाने का प्रयास करेंगे।

बिहार के मासूम बच्चों को शिक्षक आखिर कब तक नसीब होगा। इस सवाल का जवाब तो शिक्षा विभाग ही दे सकता है।

Wednesday, May 12, 2021

अभ्यर्थी ट्विटर पे पूछ रहे सवाल कब तक शिक्षक नियोजन करोगे सरकार

Patna: अभ्यर्थी ट्विटर पे पूछ रहे सवाल कब तक शिक्षक नियोजन करोगे सरकार 

बिहार में वर्षों से लंबित बिहार प्रारंभिक शिक्षक नियोजन की प्रक्रिया पूर्ण नहीं होने के कारण अभ्यार्थियों में निराशा है| अभ्यार्थियों ने ट्वीटर पे बिहार प्रारंभिक शिक्षक नियोजन पेज के बैनर तले ऑनलाइन प्रदर्शन किया|



 #पीड़ित_बिहार_शिक्षक_अभ्यर्थी हैसटैग का उपयोग करते हुए लाखों अभ्यर्थी ने अपना दर्द बिहार के नेताओं और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को टैग करके साझा किया| अभ्यार्थियों का कहना है की सरकार जानबूझ कर शिक्षक नियोजन की प्रक्रिया फसाए हुए है, सरकार कभी भी नियोजन को लेकर गंभीर नहीं हुई| 2019 में शुरू हुई बिहार प्रारंभिक शिक्षक नियोजन प्रक्रिया आज तक पूर्ण नहीं हुई जिससे अभ्यर्थी तनावग्रस्त होते जा रहे है| शिक्षक अभ्यार्थियों का मुद्दा ट्विटर पे बिहार में एक नम्बर पे ट्रेंड करता रहा| राजद ने सरकार पे गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा की बिना शिक्षक के स्कूल, क्या ये है सुशासन की सरकार?





राजद नेता अरुण कुमार यादव ने भी सरकार को नियोजन में हो रही देरी पे घेरा वहीँ बिहार कांग्रेस के युवा अध्यक्ष गुंजन पटेल ने सरकार पे नियोजन के नाम पे ठगने का आरोप लगाया जिसके बाद yuva halla bol, youth for swaraj, yuva senaऔर aisa जैसे संघठनों ने भी सरकार को शिक्षक नियोजन में हो रही देरी के मुद्दे पे घेरा |



अभ्यार्थियों का कहना है की सारी अहर्ता पूर्ण करने के बाद भी सरकार ने आज तक हमे बेरोजगार रखा| इस कोरोना काल में हम अब दाने दाने को मोहताज हो गए है| सरकार जल्द से जल्द ब्लाइंड फेडरेसन केस को सुलझाते हुए नियोजन को पूर्ण करें |एक ओर सरकार वादा करती है की माइक में अनाउंस कर कर के रोजगार दिया जायेगा वहीँ दूसरी और लाखों अभ्यर्थी का नियोजन नहीं होने से पिछले तीन साल से तनावग्रस्त है |